Beawar // राम-हनुमान मिलन से गूंजा नृसिंह मंदिर, किष्किंधा कांड के समापन पर भक्तिभाव उमड़ा

Beawar – नृसिंह मन्दिर में आयोजित हो रही मास पारायण कथा के 23 वे दिन राम रामायण मण्डल द्वारा प्रस्तुत संगीतमय चौपाइयों से सम्पूर्ण मन्दिर परिसर भक्तिमय हो गया। नृसिंह मन्दिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रमेश बंसल ने बताया कि कथा प्रसंग के अनुसार सीता को खोजते हुए राम रिष्यमूक पर्वत के समीप पहुँचे, जहाँ सुग्रीव बाली के डर से निवास कर रहा था। राम लक्ष्मण को आते देख सुग्रीव ने हनुमान को विप्ररुप में भेजा।हनुमान ने अपने इष्ट को पहचान कर दण्डवत प्रणाम किया,राम ने हनुमान को गले से लगाया। वीर हनुमान ने राम एवं लक्ष्मण को अपने कन्धों पर विराजित कर सुग्रीव के पास ले जाकर मिलवाया। सुग्रीव से सारा वृतांत सुन बाली को परनारी हरण के कारण मारने का प्रण लिया। सुग्रीव ने माता सीता द्वारा दिये गए वस्त्र राम को दिये और सीता के विलाप राम राम हा राम पुकारी कहकर सुग्रीव स्वयं भी शोक मगन हो गये। राम बाली वध हेतु सुग्रीव के साथ जाते है,दोनो भाइयो में युद्ध होता है,राम बाण नही चलाते है,क्योकि दोनो हमशक्ल है,तब अपनी माला सुग्रीव को धारण करवाकर राम बाली का वध करते है। बाली वध के कारण बाली की पत्नी तारा के विलाप करने पर राम ने सांत्वना दी एवं आप प्रवरसन पर्वत पर निवास करने लगे। लक्ष्मण ने सुग्रीव का राज्याभिषेक किया एवं बाली पुत्र अंगद को युवराज बनाया। वर्षा ऋतु समाप्त होने पर भी सुग्रीव ने सीता की खोज की सुधि नही ली,तब लक्ष्मण क्रोध से काँपते हुये सुग्रीव शरणागति भाव से राम के पास आये और चारो दिशाओं में वानर सेना को सीता की खोज में भेजा।
Beawar – राम ने हनुमानजी को दक्षिण दिशा में जाते समय अपनी मुद्रिका सीताजी को देने व समझाने का निर्देश दिया। मार्ग में जटायु भ्राता संपाति ने सारा वृतांत सुन भाई को तिलांजलि दी एवं त्रिकुट पर्वत पर लंका में सीता के निवास के बारे में बताया। जामवंत,अंगद आदि लांघने के बारे में सोचने लग गये,लेकिन दुविधा यह कि समुंदर के पर जाकर वापस कौन आ पायेगा। तब जामवंत ने हनुमान को कहा “कवन सो काज कठिन जग माही जो नही होत तात तुम पाहि” भावार्थ जग में ऐसा कौनसा काम है तो हनुमंत तुम से नही होगा। हनुमान ने राम कार्य को जानकर अपने शरीर का विस्तार किया,गोस्वामीजी मानस में लिखते है की “राम काज लगि तव अवतारा सुनतहि भयउ पर्वताकारा” हनुमान ने सिंहनाद करते हुए रावण को कुटुंब सहित मारने एवं त्रिकुट पर्वत को उखाड़ने का कहा,जामवंत ने हनुमान को समझाया कि आपको मात्र सीता माता का पता लगाना है। जामवंत के निर्देश सुनकर हनुमान सीता माता की खोज में निकल जाते है। इसी प्रंसग के साथ रामचरितमानस के चतुर्थ कांड किष्किंधा कांड का समापन एवं कथा का विश्राम हुआ। कथा महोत्सव में राम रामायण मण्डल के राजकुमार अत्रे,कृष्ण मोहन जोशी,रेखा जोशी,रामगोपाल वैष्णव,जगदीश चारण, दिनेश सिंघल नृसिंह मन्दिर ट्रस्ट के मंत्री राधेश्याम ड़ाणी,ट्रस्ट के पियूष बंसल,अभिषेक सठाक,मुकेश गुप्ता,पंकज बजारी व सुनील जिंदल,लक्ष्मीनारायण कंदोई,मांगीलाल कंदोई,सत्यनारायण असावा, उषा गर्ग,ज्योति जिंदल,लक्ष्मी शर्मा,कांता बाई सहित भक्तजन उपस्थित थे।
ब्यावर से शम्भू दयाल व्यास की रिपोर्ट
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