Banswara // बांसवाड़ा में ग्रामीण सेवा शिविरों से पशुपालकों को बड़ी राहत

Banswara – राज्य सरकार की ग्रामीण सेवा शिविर पहल बांसवाड़ा जिले में पशुपालकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। गांव-गांव आयोजित शिविरों के माध्यम से पशुपालकों को उनके घर के निकट ही गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सेवाएं, टीकाकरण, कृमिनाशक दवाइयां, बीमा योजना का लाभ तथा तकनीकी परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे न केवल पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है, बल्कि पशुपालकों का समय और आर्थिक व्यय भी बच रहा है। संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, बांसवाड़ा डॉ. अजय काशीनाथ गोले ने बताया कि जिले में अब तक कुल 415 ग्रामीण सेवा शिविरों का आयोजन किया जा चुका है। इन शिविरों में 53,238 रोगग्रस्त छोटे एवं बड़े पशुओं का उपचार किया गया, जिससे हजारों पशुपालकों को तत्काल राहत मिली। शिविरों में पशुओं की स्वास्थ्य जांच के साथ आवश्यक दवाइयां मौके पर ही उपलब्ध कराई गईं तथा गंभीर मामलों में विशेषज्ञ परामर्श भी दिया गया। उन्होंने बताया कि पशुधन को संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से व्यापक टीकाकरण अभियान भी चलाया गया। इसके तहत लम्पी स्किन डिजीज से बचाव के लिए 21,794 पशुओं का टीकाकरण किया गया, जबकि एफएमडी, पीपीआर एवं बीक्यू जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए 33,470 पशुओं को टीके लगाए गए। साथ ही पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता बनाए रखने के लिए 67,254 कृमिनाशक औषधियों का वितरण किया गया।
Banswara – ग्रामीण सेवा शिविर केवल उपचार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पशुपालकों को सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक संबल प्रदान करने का भी प्रभावी माध्यम बने। मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के अंतर्गत 4,062 पशुपालकों का पंजीयन किया गया, वहीं 25,024 पशुपालक कार्ड भी बनाए गए। शिविरों के दौरान योजना के पात्र लाभार्थियों को मंगला पशु बीमा क्लेम राशि का वितरण भी किया गया, जिससे पशु हानि से प्रभावित परिवारों को त्वरित आर्थिक सहायता मिल सकी। शिविरों में पहुंचे पशुपालकों ने बताया कि पहले पशुओं के उपचार के लिए दूरस्थ पशु चिकित्सालयों तक जाना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों खर्च होते थे। अब गांव में ही विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा उपचार, दवाइयां, टीकाकरण और आवश्यक सलाह मिलने से उन्हें बड़ी सुविधा मिल रही है। बीमा क्लेम राशि प्राप्त करने वाले लाभार्थियों ने कहा कि इस आर्थिक सहायता से उन्हें पशुपालन गतिविधियों को पुनः व्यवस्थित करने में मदद मिली है। शिविरों के दौरान पशुपालन विभाग के चिकित्सकों एवं तकनीकी दल ने पशुपालकों को पशुओं के संतुलित पोषण, स्वच्छता, समय पर टीकाकरण, कृमिनाशन तथा संक्रामक रोगों की रोकथाम के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी। पशुपालकों को पशुधन की वैज्ञानिक देखभाल अपनाने और विभागीय योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया।
बांसवाड़ा से मुकेश पाटीदार की रिपोर्ट
https://www.facebook.com/profile.php?id=61580815528140
सोजत सिटी// क्रान्तिकारी चंद्रशेखर आज़ाद को ‘राष्ट्र रत्न’ देने की मांग, सोजत में सौंपा ज्ञापन
टोंक// इलियास नकवी मेमोरियल टेनिस प्रतियोगिता पुरूस्कार वितरण के साथ सम्पन्न