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BARAN // भाषा विचारों व भावों की अभिव्यक्ति ही नहीं, संस्कृति की संवाहक भी है : वर्मा

BARAN // भाषा विचारों व भावों की अभिव्यक्ति ही नहीं, संस्कृति की संवाहक भी है : वर्मा

अखिल भारतीय साहित्य परिषद ने समारोहपूर्वक मनाया भारतीय सर्व भाषा दिवस

BARAN – अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा रविवार को पेंशनर भवन में भारतीय सर्व भाषा दिवस समारोहपूर्वक आयोजित किया गया। परिषद के प्रेस सचिव राजेश पंकज ने बताया कि कार्यक्रम विचार गोष्ठी एवं काव्य-गोष्ठी के रूप में दो सत्रों में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ रमन अजमेरा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता साहित्य परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रद्युम्न वर्मा ने कहा कि सैकड़ों भाषाओं और हजारों बोलियों से समृद्ध इस देश में कुछ राजनीतिक दल अपने निजी स्वार्थों के लिए भाषाई द्वेष का वातावरण बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाषा केवल विचारों और भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम ही नहीं होती, बल्कि वह संस्कृति की संवाहक भी होती है। हमारा सौभाग्य है कि हम ऐसे देश में रहते हैं जहाँ भाषाई विविधता अत्यंत समृद्ध है। हमें सभी भारतीय भाषाओं के प्रति प्रेम, सम्मान और समरसता का भाव रखते हुए उनके उन्नयन के लिए कार्य करना चाहिए।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जगदीश सोनी जलजला ने कहा कि भारत की लगभग सभी भाषाओं की जननी संस्कृत भाषा है। हमें अपनी स्थानीय भाषा या बोली में ही अधिकाधिक व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि उपेक्षा के कारण भाषा या बोली के विलुप्त होने का खतरा बढ़ जाता है।

विशिष्ट अतिथि श्याम अंकुर ने कहा कि धार्मिक, आर्थिक एवं अन्य प्रकार के पर्यटन से भाषाओं का परस्पर आदान-प्रदान होता है, जिससे भाषाएँ और अधिक समृद्ध होती हैं। वहीं अतिथि नाथूलाल निर्भय ने भाषाई पर्यावरण को दूषित करने वालों को पहचानने तथा अपनी-अपनी भाषा व बोली के संरक्षण पर बल दिया।

कार्यक्रम का सफल संचालन बच्छराज राजस्थानी ने किया, जिन्होंने अपने कुशल संचालन से कार्यक्रम को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में आयोजित काव्य-गोष्ठी में सोनू सुरीला, हेमराज बंसल, मनोज मस्त, सत्यनारायण शर्मा, गजेन्द्र यादव, हीरालाल कामेलिया, ओमप्रकाश साहू, हरि अग्रवाल, हरिश्चन्द्र सेन, पुष्पदयाल वर्मा, हरीश शर्मा, रवि रोबोट, लीलाधर पाँचाल, सुरेश चक्रधारी सहित अनेक कवियों ने विषय आधारित काव्यपाठ प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में नहरी किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पवन यादव मेलखेडी ने 28 दिसम्बर को परवन डेम पर काव्य-गोष्ठी एवं सहभोज के आयोजन की घोषणा की, जिसमें संभाग के सभी साहित्यकारों को आमंत्रित किया गया।

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