Baran // सालगिरह पर सेवा का संकल्प: डॉ. अनिल मर्मिट ने परिवार संग रक्तदान कर पेश की मानवता की मिसाल, अब तक 90 बार बचाई जिंदगियां
Baran – सालगिरह का महादान: डॉ. मर्मिट ने सपरिवार ब्लड बैंक पहुंच कर किया रक्तदान, कुल 90 बार बचा चुके हैं अनमोल जिंदगियां 23वीं मैरिज एनिवर्सरी* पर ‘बी पॉजिटिव’ (B+) ब्लड डोनेट कर पेश की मानवता की मिसाल। अब तक *57 बार होल ब्लड* और 33 बार प्लेटलेट्स* दान कर चुके हैं डॉ. मर्मिट। रक्तकोष फाउंडेशन, समर्पण ब्लड डोनर और नवोन्मेष सेवा समिति के जागरूकता अभियान को मिली नई ताकत। बारां आज के दौर में जहां लोग अपनी शादी की सालगिरह पर महंगे होटलों में पार्टियों और जश्न पर लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, वहीं पारलिया निवासी और रक्तकोष फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक *डॉ. अनिल मर्मिट* ने अपनी शादी की *23वीं सालगिरह* को बेहद अनूठे और मानवीय अंदाज में मनाया। डॉ. मर्मिट ने अपने पूरे परिवार के साथ एक निजी ब्लड बैंक (ब्लड सेंटर) पहुंचकर ‘बी पॉजिटिव’ (B+) रक्तदान किया। इस भावुक और प्रेरक पल का गवाह उनका पूरा परिवार बना। डॉ. मर्मिट के इस कदम ने समाज को यह संदेश दिया है कि अपनी व्यक्तिगत खुशियों को दूसरों के जीवन की रक्षा से जोड़कर कैसे यादगार बनाया जा सकता है।
रक्तदान का अनूठा ‘अर्धशतक+’: कुल 90 बार किया दान चिकित्सा और समाज सेवा के क्षेत्र में डॉ. मर्मिट अब एक बड़ा रोल मॉडल बन चुके हैं।
Baran – उनके नाम अब कुल *90 बार* रक्तदान करने का रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। इसमें उन्होंने *57 बार होल ब्लड* और *33 बार प्लेटलेट्स* दान किया है। रक्तकोष फाउंडेशन के जिला अध्यक्ष *नन्दलाल केसरी* ने डॉ. मर्मिट के जज्बे को सलाम करते हुए कहा, “डॉ. मर्मिट केवल विशेष अवसरों पर ही नहीं, बल्कि किसी भी आपातकाल (इमरजेंसी) की स्थिति में या अपने जन्मदिन पर हमेशा सबसे आगे खड़े मिलते हैं। उनका यह समर्पण हजारों युवाओं को प्रेरित कर रहा है।” गवाह बने चिकित्सा जगत के दिग्गज और परिवार**
रक्तदान की इस पूरी प्रक्रिया के दौरान डॉ. मर्मिट का हौसला बढ़ाने के लिए उनकी पत्नी सरिता मर्मिट, पुत्री दीया मर्मिट और बेटा सौम्य मर्मिट विशेष रूप से मौजूद रहे। इसके साथ ही चिकित्सा क्षेत्र की जानी-मानी हस्तियां, जिनमें सैटेलाइट हॉस्पिटल के अधीक्षक व एमबीएस अस्पताल के निवर्तमान अधीक्षक *डॉ. राकेश सिंह* और दिनेश शामिल थे, उन्होंने भी वहां पहुंचकर डॉ. मर्मिट के इस मानवीय कार्य की सराहना की “डॉ. अनिल मर्मिट का यह कदम आज की युवा पीढ़ी के लिए एक आंखें खोलने वाला संदेश है। खुशियां मनाने के मायने बदल रहे हैं, और जब इन खुशियों से किसी की डूबती हुई सांसों को सहारा मिले, तो वह उत्सव ईश्वर की इबादत जैसा पवित्र हो जाता है।
बारां से राजेश कुमार मंगल की रिपोर्ट
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