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Beawar // नृसिंह मंदिर में रामचरितमानस कथा के 24वें दिन सुंदकांड प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन, भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु

Beawar // नृसिंह मंदिर में रामचरितमानस कथा के 24वें दिन सुंदकांड प्रसंगों का हुआ भावपूर्ण वाचन, भक्तिभाव में सराबोर हुए श्रद्धालु

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Beawar – नृसिंह मन्दिर में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित हो रही रामचरितमानस मास पारायण कथा के 24 वें दिवस राम दूत हनुमान का विभीषन से मिलन,अशोक वाटिका मे मातासीता के दिव्यदर्शन,अशोकवाटिका उजाड़ने एवं अक्षयकुमार के वध की कथा को चौपाइयों के माध्यम से श्रवण करवाया गया। नृसिंह मन्दिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रमेश बंसल ने बताया कि सुन्दरकाण्ड पाठ का वाचन कर भक्तजनो ने अपने आप को कृतकृत्य महसूस किया। प्रंसग अनुसार सुनाया गया कि रघुनन्दन राम का स्मरण करते हुये गर्जना के साथ हनुमान प्रस्थान करते है,मैनाक पर्वत कपि से विश्राम करने का आग्रह करता है। गोस्वामीजी लिखते है “रामकाजु किन्हे बिना मोहि कहां विश्राम”हनुमान जी मन ही मन सोचते है कि जब तक प्रभु राम का कार्य नहीं कर लेता तब तक विश्राम नही करना चाहिये। आगे बढ़ने पर सुरसा नाम की राक्षसी ने पवनतनय का मार्ग रोका,महाबलि बजरंग ने उसे अपने विराट एवं लघु दोनो रूपों के दर्शन करवाये। लंका पहुँचकर चारो तरफ निहारकर मच्छर की भांति राम राम सुमिरन करते हुऐ लंका में प्रवेश किया। वहाँ लंकिनी को मुष्टिका प्रहार किया तब उसने रामदूत को “प्रविसी नगर कीजे सब काजा,ह्रदय राखी कौशलपुर राजा”का आशीर्वाद दिया। लंका में सीता की खोज करते करते हनुमंत को राम नाम अंकित एक गृह दिखाई दिया विभीषन से भेंट कर अशोकवाटिका में माता सीता के प्रथम दर्शन किये।

Beawar – माता सीता राम विरह में अत्यंत शोककुल है,हनुमान ने राम की निशानी सीता माता की गोदी में डालकर अपना परिचय रामदूत के रूप में दिया। तब भूखवश अशोकवाटिका उजाड़ कर फल खाने लगे,प्रसंग अनुसार हनुमान ने अक्षयकुमार का वध किया तब मेघनाथ ने हनुमान को नागपाश में बांध दिया। राज सभा मे रावण ने रामदूत हनुमान की पूंछ में आग लगाने का आदेश दिया,हनुमान ने उसी पूंछ से सारी लंका को जला डाला। लंका दहन कर हनुमान ने सीता माता से चूड़ी लेकर राम को संदेश देने हेतु पुनः प्रस्थान किया। माता सीता ने हनुमानजी को”अजर अमर गुननिधि सुत होहू।” का आशीर्वाद दिया। विभीषण रावण से विमुख होकर राम के शरणागति हो गया। सन्तो का कहना है कि ” राम सत्य संकल्प प्रभु…से सोई सम्पदा विभीषणी सकुचि दीन्ही रघुनाथ तक अर्थात सुंदरकांड के दोहा संख्या 41 से 49 तक का प्रतिदिन श्रद्धा भाव से पाठ करने पर सम्पूर्ण सुंदरकांड पाठ करने जितना पुण्यफल प्राप्त हो जाता है। विभीषण ने समुन्दर को रघुवंश का कुलगुरु बताकर मार्ग देने की विनती की,अंत मे नल निल से सेतु बनवाने का निश्चय किया। इसी प्रसंग के साथ कथा का विश्राम हुआ। कथा महोत्सव में मंदिर ट्रस्ट के मंत्री राधेश्याम ड़ाणी,पीयूष बंसल, अभिषेक सठाक,पंकज बजारी, मुकेश गुप्ता,राम रामायण मण्डल के राजकुमार अत्रे,रामगोपाल,वैष्णव,रेखा जोशी,जगदीश चारण, देवाराम,दिनेश सिंघल सहित चंद्रलेखा व्यास, मंजुला,सुनयना अरोड़ा,मालती वैष्णव,रमेश शर्मा,ज्योति जिंदल,सुनील।जिंदल,सुनील अरोड़ा,शकुंतला ड़ाणी,पुष्पा ड़ाणी सहित भक्तजन उपस्थित थे।

ब्यावर से शम्भू दयाल व्यास की रिपोर्ट

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