The Chanakya TV Rajasthan

Beawar // नरसिंह मंदिर में पुरुषोत्तम मास के तहत रामचरित मानस मास पारायण कथा का द्वितीय दिवस सम्पन्न, सती प्रसंग की हुई मार्मिक प्रस्तुति**

Beawar  // नरसिंह मंदिर में पुरुषोत्तम मास मास पारायण कथा का द्वितीय दिवस सम्पन्न, सती प्रसंग और रामचरित मानस का किया गया भावपूर्ण वाचन

Beawar
Beawar

Beawar –  शहर के मध्य स्थित नरसिंह मन्दिर में पुरुषोत्तम मास के धार्मिक महत्व एवं ईश्वर आराधना के पुण्य स्वरूप राम चरित्र मानस पर आधारित मास पारायण कथा के द्वितीय दिवस राम रामायण मण्डल के कथा राजकुमार अत्रे एवं सदस्यो ने सती भ्रम एवं सती द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की परीक्षा लेने का मार्मिक प्रसंग राम चरित्र मानस की चौपाइयों के माध्यम से प्रस्तुत किया। नरसिंह मन्दिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रमेश बंसल ने बताया कि पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु की उपासना,जप,तप एवं दान पुण्य को समर्पित होता है। इस माह में मास पारायण कथा अर्थात रामचरित्र मानस का सम्पूर्ण पाठ 30 दिन के समान अध्यायों में बांटकर एक निश्चित पाठ प्रतिदिन किया जाता है। मास पारायन पाठ के द्वितीय दिवस का प्रारम्भ मानस पूजा, व्यास पूजा एवं राम दरबार के पूजन के साथ हुआ। ट्रस्ट अध्यक्ष रमेश बंसल एवं अलखेश मुणोत ने विधि विधान से पूजा कर पाठ प्रारम्भ करवाया।

 

Beawar – प्रंसग अनुसार मानस रचियता तुलसीदासजी ने लिखा कि जो कथा देवाधिदेव महादेव ने माता पार्वती को सुनाई,वही कथा कागभुसन्दीजी को भी भगवान शिव ने सुनाई,तत्पश्चात यही कथा याज्ञवल्क्य ऋषि ने भारद्वाज ऋषि को श्रवण करवाई। गोस्वामी तुलसीदासजी ने रामचरित मानस में लिखा है कि सीता हरण पश्चात सीता के वियोग में व्याकुल राम को देखकर स्वयं शंकर रामनाम जप कर रहे थे। दक्ष कुमारी माता सती के मन में प्रभु श्रीराम की दिव्यता को लेकर उत्पन्न संदेह हुआ, भगवान शिव सती के मन के भाव को समझ गए। उन्होंने सती से कहा कि यदि तुम्हारे मन में इतना संदेह है, तो जाकर स्वयं प्रभु राम की परीक्षा ले लो। जब सती परीक्षा लेने गईं, तो उन्होंने देखा कि राम जी वास्तव में विलाप कर रहे हैं। भ्रम दूर करने के लिए, सती ने माता सीता का रूप धारण कर लिया और राम जी के सामने से गुजरीं,प्रभु श्रीराम सर्वज्ञ थे। उन्होंने तुरंत माता सती को पहचान लिया और हाथ जोड़कर विनम्रता से पूछा— “हे माता! आप अकेली वन में क्यों घूम रही हैं? आपके पति महादेव कहाँ हैं?” प्रभु का यह दिव्य रूप और आदर देखकर माता सती को अपनी भूल का बहुत पछतावा हुआ। माता सती पुनः कैलाश पधार कर शिव लीन हो गई। आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ द्वितीय दिवस की कथा का विश्राम हुआ। कथा महोत्सव में ट्रस्ट के मंत्री राधेश्याम ड़ाणी,ट्रस्टी प्रेम जिंदल, मुकेश अरड़का,पीयूष बंसल,अभिषेक सठाक,पीयूष बंसल सहित मण्डल के गुलाब सैनी,तेजनारायण व्यास,सुंदर सिंह खिंची,अनिल धाकड़ एवं भक्तजन उपस्थित थे।

ब्यावर से शम्भू दयाल व्यास की रिपोर्ट

https://x.com/tv_chanaky5736

https://www.facebook.com/profile.php?id=61580815528140

सोजत सिटी// क्रान्तिकारी चंद्रशेखर आज़ाद को ‘राष्ट्र रत्न’ देने की मांग, सोजत में सौंपा ज्ञापन

टोंक// इलियास नकवी मेमोरियल टेनिस प्रतियोगिता पुरूस्कार वितरण के साथ सम्पन्न

Exit mobile version