RAJSAMAND // जिला कलक्टर श्री अरुण कुमार हसीजा के निवास पहुंचे जैन मुनि श्री संबोध कुमार जी

आज की पीढ़ी दिग्भ्रमित, जीवन का लक्ष्य जानना जरूरी :मुनि श्री संबोध कुमार जी राजसमंद 11 जनवरी। रविवार सुबह जैन मुनि श्री संबोध कुमार जी जिला कलक्टर श्री अरुण कुमार हसीजा के राजकीय आवास पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी ओजस्वी एवं मधुर वाणी से उपस्थितजनों को आत्मचिंतन और जीवन मूल्यों की दिशा में मार्गदर्शन दिया। मुनि के आगमन पर जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा ने सपरिवार, विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों तथा जैन समाज के स्थानीय नागरिकों के साथ उनका स्वागत किया और प्रवचन का लाभ लिया। इस अवसर पर जिला कलक्टर ने स्वयं को इस पुण्य अवसर का निमित्त मानते हुए आभार व्यक्त किया।
अहिंसा और संवेदनशीलता ही जीवन का मूल आधार :-मुनि श्री संबोध कुमारअपने प्रवचन में मुनि संबोध कुमार ने कहा कि जैन दर्शन का मूल उद्देश्य यही है कि किसी भी व्यक्ति, जीव या समाज को हमारे आचरण से किसी प्रकार की ठेस न पहुंचे। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, संयम और सह-अस्तित्व की भावना से मापी जाती है। व्यक्ति को यह सतत प्रयास करना चाहिए कि वह कभी भी किसी के दुख का कारण न बने और जहां संभव हो, वहां सहारा व समाधान देने का कार्य करे।
संस्कारवान पीढ़ी का निर्माण सबसे बड़ी जिम्मेदारी :- मुनि ने बच्चों और युवाओं के संदर्भ में कहा कि परिवार और समाज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नई पीढ़ी को अच्छे संस्कार देना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, नैतिकता और जिम्मेदारी का बोध भी कराना आवश्यक है। सही संस्कारों से युक्त युवा ही समाज और राष्ट्र को सही दिशा दे सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को समय दें, संवाद करें और उन्हें जीवन के सही उद्देश्य से परिचित कराएं।

तनाव से मुक्ति के लिए श्वसन अभ्यास का महत्व:-
आज के तेज़ रफ्तार जीवन में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त करते हुए मुनि संबोध कुमार ने कहा कि मानसिक तनाव अनेक शारीरिक और मानसिक समस्याओं का कारण बनता है। उन्होंने सरल उपाय बताते हुए कहा कि दिन में कम से कम पांच बार 60 सेकंड तक श्वसन रोकने का अभ्यास करने से मन शांत होता है और तनाव में उल्लेखनीय कमी आती है। यह अभ्यास व्यक्ति को आत्मसंयम और संतुलन की ओर ले जाता है।
हर कार्य में जनहित की भावना आवश्यक:-
मुनि ने कहा कि जीवन का प्रत्येक कार्य केवल स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि जनहित की भावना से प्रेरित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने हर कर्म को समाज की भलाई से जोड़ ले, तो जीवन स्वतः ही सार्थक बन जाता है। सेवा को केवल किसी विशेष अवसर तक सीमित न रखकर, उसे जीवन की निरंतर प्रक्रिया बनाना चाहिए।
सेवा और त्याग से ही जीवन को मिलती है दिशा:-
प्रवचन के दौरान मुनि ने कहा कि सेवा और त्याग ऐसे मूल्य हैं, जो व्यक्ति को आत्मिक शांति प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा हर क्षण सेवा को समर्पित होना चाहिए, चाहे वह परिवार के प्रति हो, समाज के प्रति हो या पर्यावरण के प्रति। जब सेवा भाव जीवन का हिस्सा बन जाता है, तब व्यक्ति का दृष्टिकोण व्यापक और सकारात्मक हो जाता है।
युवाओं से सोशल मीडिया उपवास की अपील:-
मुनि संबोध कुमार ने युवाओं को विशेष संदेश देते हुए सोशल मीडिया उपवास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी अत्यधिक डिजिटल माध्यमों में उलझकर अपने वास्तविक लक्ष्य से भटकती जा रही है। लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से एकाग्रता, धैर्य और आत्मचिंतन की क्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे समय-समय पर सोशल मीडिया से दूरी बनाएं और स्वयं के भीतर झांकने का प्रयास करें।
दिग्भ्रमित पीढ़ी को सही मार्गदर्शन की आवश्यकता:-=
मुनि ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी दिग्भ्रमित अवस्था में है और उसे यह स्पष्ट नहीं है कि जीवन का वास्तविक मार्ग क्या है। ऐसे समय में परिवार, समाज और आध्यात्मिक मूल्यों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। आत्मचिंतन, संयम और सेवा के माध्यम से ही युवा अपने जीवन की सही दिशा तय कर सकते हैं।
प्रवचन के अंत में उपस्थित जनों ने मुनि के विचारों को प्रेरणादायक बताया और उन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम क…
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