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Tonk // जैन समाज की ‘संत सुरक्षा नीति’ लागू करने की मांग, साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर सौंपा ज्ञापन

Tonk // जैन साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर टोंक में प्रदर्शन, ‘संत सुरक्षा नीति’ लागू करने की मांग

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Tonk – जैन साधु-संतों के पदविहार (पदयात्रा) के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा संपूर्ण देश एवं प्रदेश में व्यापक ‘संत सुरक्षा नीति’ लागू करने की मांग की ।सोमवार को जैन समाज के लोगों ने श्री दिगंबर जैन नसिया अमीरगंज टोंक से मुख्य बाजार बड़ा कुआं ,काफला बाजार, सुभाष बाजार होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे जहां नायब तहसीलदार पूजा अटल को प्रधानमंत्री, गृहमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप करके साधु संतों की सुरक्षा नीति बनाने की मांग की। समाज के प्रवक्ता पवन कंटान एवं कमल सर्राफ ने बताया कि संपूर्ण भारतवर्ष का जैन समाज एवं अहिंसा प्रेमी नागरिक हाल ही में मध्यप्रदेश के रीवा में हुई हृदयविदारक सड़क दुर्घटना से अत्यंत मर्माहत, व्यथित और आक्रोशित हैं। इस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना में परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री १०८ विद्यासागर महामुनिराज की सुयोग्य शिष्याएं दिगम्बर जैन साध्वियां आर्यिका मां श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका मां उपशममति माताजी का सड़क दुर्घटना के कारण आकस्मिक समाधि-मरण हो गया। जैन धर्म के साधु-साध्वी आजीवन पदयात्री होते हैं। वे बिना किसी वाहन के, नंगे पैर, पूर्ण अहिंसा का पालन करते हुए पूरे देश में धर्म, शांति और व्यसनमुक्ति का संदेश देते हुए पदविहार करते हैं। विगत कुछ वर्षों से राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य मुख्य मार्गों पर यातायात के भारी दबाव, अनियंत्रित व तेज रफ्तार वाहनों के कारण जैन साधु-संतों के साथ दुर्घटनाओं की संख्या में चिंताजनक रूप से वृद्धि हुई है। पूर्व में भी कई संतों ने ऐसी दर्दनाक दुर्घटनाओं में अपने प्राण गंवाए हैं।
चूंकि संत पूरे देश में पैदल भ्रमण करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा मात्र समाज की नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की भी जिम्मेदारी है। देश के आध्यात्मिक गुरुओं के जीवन की रक्षा के लिए संत सुरक्षा नीति’ का निर्माण किया जाएं। जैन समाज ने केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार से तत्काल प्रभाव से पूरे देश व प्रदेश में पदविहार करने वाले जैन साधु-संतों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक ‘संत सुरक्षा नीति’ लागू किए जाने की मांग की। साथ ही अनिवार्य पुलिस एस्कॉर्ट एवं पेट्रोलिंग की व्यवस्था संतों के पदविहार के दौरान स्थानीय प्रशासन द्वारा उन्हें अनिवार्य रूप से पुलिस सुरक्षा (एस्कॉर्ट) या होमगार्ड की सुनिश्चितता की जावे।

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Tonk – उन्होंने थानों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए जिस थाना क्षेत्र से संतों का विहार (पदयात्रा) हो रहा हो, वहां की पुलिस अगले थाना क्षेत्र को पूर्व सूचना देकर सुरक्षा की निरंतरता बनाए रखे।साथ ही राजमार्गों पर सुरक्षित व्यवस्था हो तथा हाईवे और मुख्य मार्गों पर पदयात्रियों के लिए सुरक्षित लेन सुनिश्चित की जाए तथा संतों के विहार के समय यातायात को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग या रिफ्लेक्टर आदि की व्यवस्था की जाए। जैन समाज टोंक ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि रीवा दुर्घटना सहित पूर्व में हुई सभी ऐसी घटनाओं की उच्च स्तरीय जांच हो और लापरवाही बरतने वाले वाहन चालकों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करके उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि जैन साधु-संत देश की अमूल्य आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनकी रक्षा करना शासन का नैतिक एवं संवैधानिक दायित्व है। जैन समाज ने विश्वास है व्यक्त करते हुए कहा हैं कि सरकार इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए अविलंब ‘संत सुरक्षा नीति’ लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लेगी ताकि भविष्य में ऐसी हृदयविदारक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।इस दौरान जैन समाज के सेकडो की संख्या में पुरुष व महिलाएं उपस्थित थे।

टोंक से अशोक शर्मा की रिपोर्ट

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