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Tonk // चतुर्भुज तालाब किनारे काव्य गोष्ठी, कवियों ने रचनाओं से बांधा समां, पर्यटन विकास की अपील

Tonk // चतुर्भुज तालाब किनारे काव्य गोष्ठी, कवियों ने रचनाओं से बांधा समां, पर्यटन विकास को लेकर उठी अपील

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Tonk – टोंक की दर्शनीय स्थलों के विकास की ओर जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग, जनप्रतिनिधि और आमजन का ध्यान आकर्षित करने के लिए मां स्मृति संस्थान टोंक ने एक लघु काव्य गोष्ठी का आयोजन चतुर्भुज तालाब के किनारे ताल की पाल पर काव्य लहरें किया। काव्य गोष्ठी में कवि प्रदीप पंवार ने चतुर्भुज की तालाब की प्राचीनता खूबसूरती का जिक्र किया।उन्होंने अपनी कहा कि “धर्म जाति न पंथ कोई हम वतन पहचान रखें शीश पर रखें संविधान को, लब पे राष्ट्रगान रखें प्यार मोहब्बत इश्क वार दें मातृभूमि के मान पर, सब रिश्तो में सबसे ऊपर अपना हिंदुस्तान रखें” कविता सुनाकर आनन्दित किया।
युवा कवि अक्षय बोहरा ने वर्तमान युग में बुजुर्गों की पीड़ा को बहुत ही मार्मिक ढंग से अपनी कविता में इस तरह प्रस्तुत किया_ “दो दिन से घर पे पूछने कोई नहीं आया बीमार तूने खाना भी खाया नहीं खाया भेजी थी खबर बेटे को हैं आखिरी सांसे बीबी की कैद से वो निकल ही नहीं पाया” सुनाकर दाद पाई। कवि दयाशंकर शर्मा ने जल के महत्व को इस तरह अभिव्यक्त करते हुए अपना गीत पढ़ा_ “जल जीवन आधार है बंदे जल जीवन का सार” सुनाकर गोष्ठी को सार्थक किया। गीतकार हनुमान बादाम ने बेटी की विदाई का करूण गीत को अपनी काव्य शैली में इस तरह पेश किया_ “मेरी लाडो मेरी बिटिया, तू मेरी गुड़िया रानी बाबुल का घर छोड़ चली क्यूँ, रीत ये कैसी बेगानी ” सुनाया तो सभी ने वाह वाह किया । इसी के साथ सभी कवियों ने टोंक के दर्शनीय स्थलों खूबसूरत बनाने के लिए अपील की।

टोंक से अशोक शर्मा की रिपोर्ट

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