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TONK // देर रात तक खूब जमा कवि सम्मलेन

TONK // हास्य कवि रणजीत राणा भीलवाड़ा ने सरपंच पुराण और राजस्थानी शान

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टोंक।बनास महोत्सव एवं स्व.अटल बिहारी वाजपेयी जयंती के अवसर पर जिला प्रशासन एवं पर्यटन विभाग की और से आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन देर रात तक चला। कवि सम्मेलन का शुभारंभ जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल, पूर्व सभापति नगर परिषद लक्ष्मी जैन एसडीएम हुक्मीचंद , पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक मधुसूदन सिंह एवं कवियों ने मां सरस्वती एवं स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण करके किया.. कवि सम्मेलन में रायबरेली की कवयित्री कोमल नाजुक ने सरस्वती वंदना और मंच संचालक अन्तर्राष्ट्रीय कवि प्रदीप पंवार ने प्रभु श्री राम वन्दना से सरस भावपूर्ण शुरुआत की..। कवि सम्मलेन में वीररस के विख्यात कवि वेदव्रत वाजपेयी लखनऊ ने देशभक्ति से ओतप्रोत अभी तिरंगे के रंगों का ठीक से उडना बाकी है,कटे-फटे इस मानचित्र का पूरा जुड़ना बाकी है ,पंजा साहब ननकाना में शक्ति प्रदर्शन करना है ,हमको भी तो हिंगलाज माता के दर्शन करना है,तिब्बत वाले बौद्ध मठों से आशीषों की आशा है,मानसरोवर का पावन जल पीने की जिज्ञासा है कविता सुनाई तो ऑडिटोरियम भारत माता की जय वंदे मातरम और तालिया से गूंज उठा..

हास्य के धुरंधर कवि दिनेश देसी घी मध्य प्रदेश ने हास्य रस से परिपूर्ण काव्य पाठ कर श्रोताओं को हंस कर लोटपोट करते हुए सारी विश्व गगन पर आपकी हम तिरंगा फहराएंगे विश्व गुरु थे और रहेंगे आगे भी कहलाएंगे, जो ना चाहे वह ना बोले लेकिन गरलता ना बोले,हम बोलेंगे जय भारत की, वंदे मातरम गायेंगे सुनाकर खूब तालियां बटोरी..। हास्य के सूरत अजनबी जयपुर ने खूब हंसाते हुए शहर के दिखाके सपने नगरी भी ले गया,रेल तो आयी नहीं वो पटरी भी ले गया,चराने भेजा था जिसे ग्वाल बनाके मैंने,भागा जो तो भागा मेरी बकरी भी ले गया…करारे व्यंग्य कर छाप छोड़ते हुए खूब तालियां बजवाई।
मंच संचालक अन्तर्राष्ट्रीय कवि प्रदीप पंवार ने अरावली पर कुछ इस तरह- किसी की ज़िन्दगी मिटाना नहीं बनाना है, अंधेरों से हार जाना नहीं, लड़ जाना है जब अरावली की अस्मिता खतरे में हो, तो पीछे मुड़ जाना नहीं टकराना है कविता सुनाई तो खूब तालियों की गड़गड़ाहट हुई.

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अंतर्राष्ट्रीय शायर डॉ जिया टोंकी ने ग़ज़ल, तरन्नुम में कहीं दौलत कहीं शोहरत कहीं दुकान रख देना, मेरे हिस्से में एक मजबूर की मुस्कान रख देना, बहुत पावन बहुत शीतल बहुत निर्मल है यह धरती, मेरी हर आस्था का नाम हिंदुस्तान रख देना शायरी सुना कर खूब दाद पाई,
हास्य कवि रणजीत राणा भीलवाड़ा ने सरपंच पुराण और राजस्थानी शान
हम राजस्थान के लोग इसलिए गर्व से सीना तानते हैं, क्योंकि हम प्रेम में जहर भी पीना जानते हैं
राष्ट्रीय कवियित्री कोमल नाजुक रायबरेली ने

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* *आन हैं बान हैं शान हैं लड़कियां ! घर की रौनक भी हैं मान हैं लड़कियां !!
इक पिता के लिए होती क्या लड़कियां ? दिल हैं लड़के अगर जान हैं लड़कियां !!*
सुनाकर माहौल को भावपूर्ण कर दिया। राष्ट्रीय कवयित्री दीपा सैनी ने गीत गजल और श्रृंगार पर
कविता पाठ करते हुए मुहब्बत का शजर तुमको ये मौसम सर्द लगता है, चेहरों पर यतीमो के ये मौसम जर्द लगता है,नहीं आसाँ यूँ सड़कों पर बिना छत के बसर करना कि कंबल बांटता है वो, जिसे ये दर्द लगता है वाह वाही लूटी
श्रोताओं से खचाखच भरे आडिटोरियम में देर रात तक चले कवि सम्मलेन में कलेक्टर कल्पना अग्रवाल, सीईओ परशुराम धानका, एसडीएम हुकमीचंद रोलानिया, नगर परिषद की पूर्व सभापति लक्ष्मी जैन,पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक मधुसूदन सिंह, डॉ राजीव बंसल, भगवान भंडारी, रोहित कुमावत, रमेश काला,सत्यनारायण नामा,बादल साहू , हरवंश शर्मा सहित कई गणमान्य श्रोता उपस्थित रहे।

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टोंक से अशोक शर्मा ‌की रिपोर्ट

TONK// जिला निर्वाचन अधिकारी ने किया मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य का निरीक्षण

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