UGC // विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई अधिसूचना को लेकर उपजा आक्रोश अब सड़कों पर उतर आया है। गुरुवार को कवाई कस्बे में सवर्ण समाज ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ हुंकार भरी। अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित एक बड़ी बैठक के बाद समाज ने दो-टूक एलान किया कि 1 फरवरी को क्षेत्र में पूर्ण ‘व्यापारिक बंद’ रखा जाएगा। समाज के प्रतिनिधियों ने इस लड़ाई को ‘अस्तित्व की लड़ाई’ करार देते हुए चेतावनी दी है कि यदि अधिसूचना वापस नहीं ली गई, तो आंदोलन और उग्र होगा।

वाहन रैली निकाल थाने पहुंचे, जमकर की नारेबाजी
दोपहर 3 बजे शुरू हुई बैठक में यूजीसी के नए नियमों की बारीकियों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की यह नीति सामाजिक समरसता को बिगाड़ने वाली और भेदभावपूर्ण है। बैठक के बाद दर्जनों वाहनों का काफिला रैली के रूप में थाने पहुँचा, जहाँ प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर 13 जनवरी को जारी गजट अधिसूचना को तुरंत निरस्त करने की मांग की गई।

खास बातें: जो आपको जाननी चाहिए
अल्टीमेटम: 13 जनवरी की अधिसूचना को भेदभावपूर्ण और असंतुलित बताया।
महामंथन: अग्रवाल धर्मशाला में हुई बैठक में चार दर्जन से अधिक प्रबुद्ध जन रहे मौजूद।
बंद का दायरा: 1 फरवरी को बाजार रहेंगे बंद; केवल दूध और मेडिकल जैसी सेवाओं को छूट।
मुनादी: शनिवार को माइक से कस्बे में बंद को सफल बनाने की घोषणा की जाएगी।
युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़
बैठक में उपस्थित समाज के प्रतिनिधियों ने कड़े शब्दों में कहा— “यह कानून सवर्ण समाज के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। हम अब चुप नहीं बैठेंगे। 1 फरवरी का बंद तो महज एक शुरुआत है, हक मिलने तक लड़ाई जारी रहेगी।
शनिवार को होगी मुनादी, व्यापारियों से मांगा सहयोग
बंद को सफल बनाने के लिए शनिवार को कस्बे में माइक के जरिए मुनादी (सार्वजनिक घोषणा) करवाई जाएगी। सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने स्थानीय व्यापारियों से स्वैच्छिक बंद रखने की अपील की है। पुलिस प्रशासन को दिए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बंद शांतिपूर्ण होगा, लेकिन समाज की मांगें पूरी न होने तक विरोध का स्वर मध्यम नहीं पड़ेगा।
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