Beawar // कलियुग में भागवत कथा श्रवण सबसे प्रभावशाली साधना : महंत गोस्वामी

Beawar – श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की त्रिवेणी है तथा 17 पुराणों का निचोड़ श्रीमद्भागवत महापुराण में समाहित है। यह उद्गार ललित संप्रदायाचार्य महंत संजय गोस्वामी ने कथा प्रवचन के दौरान व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सत्य, धर्म, प्रेम और भगवान की भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य के अंत:करण का शुद्धिकरण होता है, जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है तथा ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण की भावना जागृत होती है। भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भागवत हमें यह संदेश देती है कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति और लोककल्याण है। महंत श्री गोस्वामी जी महाराज ने कहा कि कलियुग में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण सबसे सरल और प्रभावशाली साधना है।

Beawar – इसके माध्यम से व्यक्ति सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर आध्यात्मिक शांति एवं आत्मिक आनंद की अनुभूति कर सकता है। कथा के प्रत्येक प्रसंग में जीवन को सफल और सार्थक बनाने की प्रेरणा छिपी हुई है। कथा आयोजन के आयोजक राजेश शर्मा ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों का प्रसार करना है। कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर कथा अमृत का रसपान कर रहे हैं तथा भक्ति रस में सराबोर हो रहे हैं। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन, संकीर्तन एवं धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य बताया तथा आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कथा के दौरान भगवान के जयकारों से समूचा परिसर गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति भाव में लीन दिखाई दिए।
ब्यावर से शम्भू दयाल व्यास की रिपोर्ट
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