The Chanakya TV Rajasthan

JODHPUR // दादागुरू श्री जिनदत्तसूरि चादर महोत्सवः श्रद्वा, इतिहास और सामाजिक चेतना का महापर्व जैसलमेर में

JODHPUR // दादागुरू श्री जिनदत्तसूरि चादर महोत्सवः श्रद्वा, इतिहास और सामाजिक चेतना का महापर्व जैसलमेर में

JODHPUR
JODHPUR

JODHPUR – जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ परंपरा के प्रथम दादागुरू श्री जिनदत्तसूरि की स्मृति में आगामी 6 से 8 मार्च 2026 को जैसलमेर में आयोजित होने जा रहा चादर महोत्सव श्रद्वा, इतिहास और सामूहिक सांस्कृतिक चेतना का एक ऐतिहासिक आयोजन होगा। यह जानकारी आज जोधपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस समिति के अध्यक्ष महाराष्ट्र के कौशल विकास एवं उधमिता मन्त्री मगल प्रभात लोढ़ा, सयोजक सघवी तेजराज गुलेच्छा, समायोजन महेन्द्र सिंह भन्साली
ने दी। मीडिया प्रभारी दीपक कुमार सिंघवी ने बताया कि
महोत्सव परम पूज्य गच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभ सूरीश्वर जी महाराज, अन्य पूज्य आचार्यों, शताधिक जैन साधु-साध्वियों तथा वैदिक परंपरा के लगभग 200 संतों के सान्निध्य में संपन्न होगा। देश-विदेश से 15 से 20 हजार श्रद्वालुओं की सहभागिता अपेक्षित है।

JODHPUR

JODHPUR – 6 मार्च को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूज्य सरसंघ चालक श्री मोहनराव भागवत जी इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्घाटन करेंगे। 7 मार्च को भव्य वरघोड़े के साथ चादर को महोत्सव स्थल पर लाया जाएगा, जहाँ श्रद्वालुओं द्वारा विधिपूर्वक अभिषेक किया जाएगा। इसी अवसर पर संपूर्ण विश्व में 1 करोड़ 8 लाख भक्तों द्वारा सामूहिक दादागुरू इकतीसा का पाठ किया जाएगा। 8 मार्च को पूज्य उपाध्याय श्री महेन्द्रसागर जी महाराज को आचार्य पद प्रदान किया जाएगा।
महोत्सव के अंतर्गत “भारतीय सांस्कृतिक एकात्मता एवं सामाजिक समरसता में दादागुरू परंपरा का योगदान” विषय पर एक विद्वत संगोष्ठी का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें देशभर के विद्वान, शोधार्थी और सामाजिक चिंतक सहभागिता करेंगे।

JODHPUR – प्रवक्ताओं ने बताया कि यह महोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि दादागुरूदेव श्री जिनदत्तसूरि की साधना, करूणा और सामाजिक संतुलन की परंपरा को समर्पित एक जीवंत सांस्कृतिक पर्व है।
दादागुरू के स्वर्गवास के पश्चात् उनके अग्नि संस्कार के समय उनकी चादर एवं साधना-सामग्री का अग्नि से अप्रभावित रहना उनकी उच्च आध्यात्मिक साधना और आत्मिक तेज का प्रतीक माना जाता है। यही चादर आज श्रद्धालुओं के लिए विघ्नहर्ता और कल्याणकारी आस्था का केंद्र बनी हुई है।

JODHPUR – Vऐतिहासिक रूप से यह चादर अजमेर से अन्हिलपुर पाटन (गुजरात) ले जाई गई थी। लगभग 150 वर्ष पूर्व जैसलमेर में महामारी फैलने पर जैसलमेर के महारावल के निवेदन पर यह चादर जैसलमेर लाई गई, जिसके बाद से यह जैसलमेर के ज्ञान भंडार में सुरक्षित संरक्षित है। दादागुरू के स्वर्गवास के 871 वर्ष पश्चात प्रथम बार इस चादर का विधिवत अभिषेक जैसलमेर में किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि दादागुरू श्री जिनदत्तसूरि (11-12वीं शताब्दी)
केवल जैन आचार्य ही नहीं, बल्कि मध्यकालीन भारत में सामाजि

जोधपुर से रिपोर्टर बृजकिशोर पारीक

https://x.com/tv_chanaky5736

https://www.facebook.com/profile.php?id=61580815528140

BARAN// 259 यूनिट रक्तदान करके हर्षोल्लास से मनाया केसरी का जन्मदिन

TONK – मेहरु ग्राम पंचायत में जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल की अध्यक्षता में रात्रि चौपाल आयोजित

Chomu : चौमूं में क्यों चलाना पड़ा बुलडोज़र! जहां पुलिस पर हुई पत्थरबाजी, वहीं हुआ बुलडोजर एक्शनGovernment – राजस्थान के मरीजों को बड़ी राहत, मां योजना का विस्तार, देशभर के अस्पतालों में मिलेगा निःशुल्क उपचार

Exit mobile version