Tonk // टोंक में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान, अपहरण-बाल तस्करी से बचाव के बताए उपाय
Tonk – ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे अभियान के तहत बच्चों को अपहरण, बाल तस्करी एवं शोषण से बचाव की दी विधिक जानकारी राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, टोंक के तत्वावधान में ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे’ विधिक साक्षरता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत आज दिनांक 01 सितम्बर 2026, मंगलवार को जिले के विभिन्न विद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान न्यायिक अधिकारियों द्वारा विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर उन्हें बाल अपहरण, बहला-फुसलाकर ले जाना, बाल तस्करी, बाल श्रम, जबरन भिक्षावृत्ति तथा बच्चों के विभिन्न प्रकार के शोषण से बचाव के संबंध में महत्वपूर्ण विधिक एवं व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई। जिला एवं सेशन न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, टोंक की अध्यक्ष डॉ. सीमा अग्रवाल ने सेंट सोल्जर पब्लिक स्कूल, टोंक में विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने बच्चों को समझाया कि किसी अनजान व्यक्ति द्वारा अत्यधिक पूछताछ करना, बिना कारण महंगे उपहार देना, झूठे तरीके से परिचय देना, किसी अनजान स्थान पर चलने के लिए कहना अथवा संदिग्ध वाहन का पीछा करना जैसे संकेत संभावित खतरे की ओर इशारा कर सकते हैं। विद्यार्थियों को ऐसी स्थिति में तत्काल माता-पिता, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय वयस्क को सूचना देने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में प्राधिकरण सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश दिनेश कुमार जलुथरिया ने बताया कि अपहरण एवं बहला-फुसलाकर ले जाने की घटनाओं से बचाव के लिए बच्चों का सतर्क रहना अत्यंत आवश्यक है।Tonk – उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति पर आसानी से विश्वास न करें, अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे घर का पता, मोबाइल नंबर अथवा विद्यालय की जानकारी अनजान व्यक्तियों के साथ साझा न करें तथा किसी संदिग्ध परिस्थिति में अकेले रहने के बजाय तत्काल सुरक्षित एवं भीड़भाड़ वाले स्थान पर जाएं। बच्चों को यह भी बताया गया कि सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन माध्यमों के जरिए भी अपराधी बच्चों को बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसा सकते हैं। शिविरों में बाल तस्करी के विभिन्न तरीकों के बारे में भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। बच्चों को बताया गया कि कई बार अपराधियों द्वारा नौकरी, बेहतर शिक्षा, आर्थिक लाभ अथवा अन्य सुविधाओं का लालच देकर बच्चों को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाया जाता है। इसके पश्चात उनका बाल श्रम, जबरन भिक्षावृत्ति अथवा अन्य प्रकार के शोषण में उपयोग किया जा सकता है। विद्यार्थियों को ऐसी परिस्थितियों में सजग रहने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना देने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को संकट की स्थिति में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर तत्काल संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दोरान जिला मुख्यालय पर कई स्कूलों मे विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।