Baran // कवाई में अदानी पावर प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, रोजगार और विकास को लेकर उठी आवाज

Baran – बारां जिले के कवाई स्थित अदानी पावर प्लांट के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों, किसानों, महिलाओं और युवाओं का आक्रोश शुक्रवार को खुलकर सामने आ गया। सामाजिक कार्यकर्ता तरुण मीणा के नेतृत्व में आयोजित संवैधानिक धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर रोजगार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक दायित्व (CSR) और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों पर कंपनी प्रबंधन एवं प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र की जमीन, जल और संसाधनों का उपयोग होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। ग्रामीणों का कहना था कि वर्षों से संचालित उद्योग से अपेक्षित लाभ क्षेत्र के लोगों तक नहीं पहुंच पाया है, जबकि रोजगार और विकास के नाम पर किए गए वादे आज भी अधूरे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार समिति का गठन किया जाए तथा भर्ती प्रक्रिया में क्षेत्र के योग्य अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही सीएसआर मद में गांवों के विकास कार्यों की निगरानी के लिए अलग समिति बनाकर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। धरने में पर्यावरणविद् गब्बर यादव, समाजसेवी एवं कॉमेडियन लवेश गुर्जर, भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधियों, युवा संघर्ष समिति के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने प्लांट से कथित प्रदूषण, किसानों की समस्याओं, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, चिकित्सा सुविधाओं की कमी तथा सामाजिक विकास कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं होने के मुद्दे भी उठाए।

Baran – प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने अटरू तहसीलदार महेंद्र चतुर्वेदी को ज्ञापन सौंपकर मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की। ज्ञापन में स्थानीय युवाओं को रोजगार, किसानों को राहत, प्रभावित गांवों के विकास, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई। धरना पूरी तरह संवैधानिक और शांतिपूर्ण रहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा तथा सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी की गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। कवाई क्षेत्र में उभरा यह जनाक्रोश अब केवल रोजगार का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय अधिकारों, पर्यावरणीय सुरक्षा और विकास में भागीदारी की बड़ी लड़ाई के रूप में सामने आ रहा है। लीड “जमीन हमारी, संसाधन हमारे, फिर रोजगार और विकास में हिस्सेदारी क्यों नहीं?” इसी सवाल के साथ कवाई में अदानी पावर प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर उतर आया। रोजगार, प्रदूषण और क्षेत्रीय विकास को लेकर उठी यह आवाज आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन बन सकती है।
बारां से राजेश कुमार मंगल की रिपोर्ट
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