Beawar // नृसिंह मन्दिर मास पारायण कथा महोत्सव षष्टम दिवस

Beawar – शहर के मध्य स्थित नृसिंह मन्दिर में मास पारायण कथा महोत्सव के षष्टम दिवस अध्यक्ष रमेश बंसल,अलकेश मुणोत ने विधि विधान से पूजन अर्चन पश्चात मानस की प्रसिद्ध चौपाइयों के साथ राजा प्रतापभानु,उनके भाई एवं सचिव को शापवश एक कल्प में ऋषि पुलस्त्य के यहॉ रावण,कुम्भकर्ण एवं विभीषण के रूप में जन्म लेना पड़ा,रावण ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा से वर मांगा की वानर एवं मनुष्य के अतिरिक्त कोई हमारी मृत्यू का कारण ना बन सके *हम काहू के मरहि न मारे, बानर मनुज जाति दुइ बारे।।*इसी प्रकार कुम्भकर्ण ने निद्रा पर विजय का वरदान मांगना चाहा परन्तु माँ शारदा ने मति भ्रम कर दी एवं छः माह एवं एक दिवस जागने का वरदान मांगा इसी प्रकार विभीषण ने भगवान के चरण कमल का अनुराग मांगा, यह सभी वरदान ब्रह्माजी द्वारा उन्हें प्रदान किये गये। मय राजा ने अपनी पुत्री मंदोदरी का विवाह रावण के साथ किया एवं त्रिकुट पर्वत पर सोने की लंका दहेज में दी। रावण लंका का राजा बनकर देवताओं से बैर करने लगा एवं एक दिन कुबेर का पुष्पक विमान ले आया। रावण ने अभिमान पूर्वक देव यज्ञ,तप नष्ट करने के आदेश दिये, सभी देवताओं ने इस कष्ट से मुक्ति की पुकार करने लगे। इसी प्रसंग के साथ कथा का विश्राम हुआ। आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। कथा महोत्सव में राधेश्याम ड़ाणी,प्रेम जिंदल,मुकेश गुप्ता,शांतिप्रकाश ड़ाणी,लक्ष्मी शर्मा,उर्वशी उपस्थित थे।
ब्यावर से शम्भू दयाल व्यास की रिपोर्ट
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