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TONK // विश्व प्रसिद्ध शोध संस्थान के महत्व को किया गया प्रतिपादित, यहां की समस्याओं के लिए हर संभव संघर्ष का लिया गया संकल्प

TONK // विश्व प्रसिद्ध शोध संस्थान के महत्व को किया गया प्रतिपादित, यहां की समस्याओं के लिए हर संभव संघर्ष का लिया गया संकल्प

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TONK – मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी-फारसी शोध संस्थान (MAAPRI), टोंक के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक महत्व को रेखांकित करने तथा वर्तमान समय में इसकी बढ़ती प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम टोंक प्रोग्रेसिव कमेटी के तत्वावधान में सवाई माधोपुर हाईवे पुलिया के समीप राज मिडवे में आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व आईएएस जाकिर हुसैन ने संस्थान के महत्व को देखते हुए इसके विकास के लिए हर संभव भरोसा दिलाया।

 

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TONK – मौलवीं सईद साहब की सरपरस्ती में आयोजित इस सेमिनार में कई प्रबुद्धजनों ने विचार व्यक्त किए। मौलवीं सईद साहब ने दुआएं खैर की। सेमिनार की अध्यक्षता सेवानिवृत्त जिला एवं सेशन न्यायाधीश अयूब खान ने की। उन्होंने इस संस्थान में भर्ती सहित अन्य समस्याओं के लिए कानूनी तौर पर भी सहयोग करने पर जोर दिया तथा जनहित के कार्य के लिए तत्परता से कार्य करने का भरोसा दिलाया। इस मौके प्रोग्रेसिव कमेटी के संरक्षक एवं संयोजक सरताज अहमद एडवोकेट ने इस संस्थान के महत्व एवं वर्तमान स्थिति को अवगत कराते हुए इसके लिए इमानदारी से प्रयास करने की आवश्यकता बताते हुए सभी को संकल्पित किया।

TONK – सदर मुफ्ती आदिल नदवी ने तहकीक पर विशेष जोर देते हुए शोध संस्थान को विश्वविद्यालय के रुप में विकसित किए जाने की बात रखी। इस मौके पर जयपुर के समाजसेवी एवं शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े आजम बैग ने शोध संस्थान के लिए आर्थिक सहयोग देने पर जोर देते हुए इसके लिए समर्पित भाव से कार्य करने की बात कहीं। सेठ मोइनुद्दीन निजाम, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कमलेश सिंगोदिया ने शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए देश-विदेश में टोंक का नाम रोशन करने वाले इस संस्थान के उत्थान के लिए हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उर्दू के विद्वान शौक अहसनी, डा. अरशद अबुल हमीद, कैलीग्राफिस्ट मुतीउल्लाह वासिफी ने नज्म के जरिए अपनी बात रखी। आमिर सिद्दीकी ने अरबी में पत्र वाचन किया। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मोहम्मद शरीफ आदि ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसके मकसद को साकार करने पर जोर दिया। इस संस्थान की किताबों की सूची सहित कई जानकारियों डिजिटल प्लेट फार्म पर जारी करने के लिए मोहसीन रशीद ने आव्हान किया।

 

TONK – वक्ताओं ने संस्थान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संस्थान राजस्थान सरकार द्वारा स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त केंद्र है, जो अरबी, फारसी तथा उर्दू भाषाओं के दुर्लभ पांडुलिपियों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और शोध सामग्री का खजाना है। टोंक रियासत की समृद्ध विरासत से जुड़े हजारों पांडुलिपियां यहां संरक्षित हैं, जो न केवल इस्लामी अध्ययन बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक-सामाजिक इतिहास की समझ के लिए अमूल्य हैं। वर्तमान आवश्यकता पर जोर देते हुए वक्ताओं का कहना था कि वैश्वीकरण के दौर में अरबी-फारसी जैसी प्राचीन भाषाओं का अध्ययन न केवल धार्मिक-सांस्कृतिक समझ को मजबूत करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों, अनुवाद, शोध और डिजिटल संरक्षण के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खोलता है। युवा पीढ़ी को इन भाषाओं से जोड़ना समय की मांग है, ताकि हमारी साझा सभ्यता की जड़ें मजबूत रहें।
इस मौके पर पूर्व अध्यक्ष शैलेंद्र शर्मा, अजीजुल्लाह शीरानी,समाज सेवी मुरारी सिंहल, शहाब अहमद एडवोकेट आदि ने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर शकील अहमद
डा. मोहम्मद अकमल, राजेंद्र गोयल, अहसान बाबा, सहित शहर के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

 

टोंक से अशोक शर्मा की रिपोर्ट ‌

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