TONK \\ जिला कारागृह टोंक में आध्यात्मिक कार्यक्रम, माताजी ने बंदियों को दी सकारात्मक जीवन की सीख

TONK – जिला कारागृह टोंक में शुक्रवार को दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में पूज्य आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी के सान्निध्य में आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माताजी ने जेल में निरुद्ध बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में परिवर्तन का द्वार सदैव खुला रहता है। यदि व्यक्ति सच्चे मन से आत्मचिंतन कर धर्म, संयम एवं सदाचार का मार्ग अपनाए तो उसका जीवन पूरी तरह बदल सकता है। माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि क्रोध, अहंकार एवं बुरे कर्मों से मनुष्य का पतन होता है,
TONK – जबकि क्षमा, संयम एवं सदाचार से जीवन में नई दिशा मिलती है। उन्होंने बंदियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जेल का समय आत्ममंथन का अवसर है तथा इस अवसर का सदुपयोग करके व्यक्ति अपने जीवन को सकारात्मक दिशा दे सकता है। इस अवसर पर पूर्व सभापति लक्ष्मी जैन ने भी बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म एवं सदाचार मनुष्य के जीवन को नई दिशा देते हैं। यदि व्यक्ति अपने भीतर सकारात्मक सोच एवं अच्छे संस्कारों को अपनाए तो जीवन में हर परिस्थिति को बदल सकता है। प्रवचन के दौरान सभी बंदियों ने बड़ी श्रद्धा और ध्यानपूर्वक माताजी के विचारों को सुना। माताजी ने उन्हें अहिंसा, सत्य एवं आत्मसंयम का संदेश देते हुए भविष्य में बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर पूर्व सभापति लक्ष्मी जैन, भाजपा नेता विनायक जैन, एडवोकेट तेजमल जैन, ताराचंद जैन, श्यामलाल जैन, पीसी छाबड़ा, नवीन जैन, विकास अतार, मैना जैन, बाबूलाल रानोली, रिंकू, राजेश शिवाड़ वाले सहित समाज के कई गणमान्य एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने जेलर राजेश मीणा का आभार व्यक्त किया। उपस्थित समाजजनों ने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
टोंक से अशोक शर्मा की रिपोर्ट
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